कुछ नेता तो मस्त हैं
छान मलाई भांग।
टी.वी.,माइक पर करें
राष्ट्र भक्ति का स्वांग।।
बेशर्मी और धौंस का
सुंदर रेलमपेल।
इक नेता में देखिए,
पैसा लूटू खेल।।
शब्द पैंतरेबाजियां
थूंको-चाटो दांव।
ढेढ़ा फाटे,पर रखें-
दो नावों पर पांव।।
गदहपचीसी गा रहे
हैं चुनाव दौरान।
नेता छोड़ के केंचुलें
बनें राम-रहमान।।
स्याही करतूतें सभी
बन गईं आज सफेद।
दल बदली से सिल गए
सभी सड़ैंधे छेद।।
निर्बल की सब जोरुएं
सरहज पड़तीं जान।
ऐसी दिव्य निगाह शुचि
नेता की पहचान।।
पड़े न कीड़ा जीभ में
होय न तन में कुष्ट।
ऐसा प्रभु आशीष है
नेता व्यक्ति न दुष्ट।।
देखैं जित बकरा बना
शोर करैं उत जांय।
पल्थी मारि के बेशरम्
सुरुवा-रोटी खांय।
इन्द्रासन बिन इन्द्र ज्यों
करे छल कपट, रोय।
त्यों ही नेता सीट बिन
रोवै आपा खोय।।
विधुर ससुर असहाय ज्यों
होय बहू के राज।
त्यों विपक्ष की नानियों
के बिगड़े सब काज।
सतीश चन्द्र श्रीवास्तव
रामपुर मथुरा जिला सीतापुर


