
धन्य हुए सब भारतवासी, उन्नत मांँ का भाल हुआ ।
पुण्य धरा पर जन्म लिया जो,ऐसा माँ का लाल हुआ।।
भीमराव जी बने रचयिता, संविधान की शान रखे।
सर्व धर्म समभाव भरा है, जन-जन का सम्मान रखे।।
सबसे प्यारा सबसे न्यारा, शिक्षा का उंँजियारा है।
समता का अधिकार समाहित, जिसने देश संँवारा है।।
सार लिखा उज्जवल भविष्य का, नारी को स्थान मिला।
एकता अखंडता लक्ष्य है इसका, जन हित का पुष्प खिला है।।
धैर्य तपस्या त्याग तपो की, अनुपम एक निशानी है।
जिसकी गौरव गरिमा को अब, दुनिया ने पहचानी है।।
सन उन्नीस सौ सैंतालिस में, मिली देश को आजादी।
पर गणतंत्र नहीं बन पाया, सहमी-सहमी आबादी।।
एक समिति फिर गठित हुई थी,कर्तव्यों का बोध हुआ।
सबका साथ विकास लिखा फिर,जनमानस पर शोध हुआ।।
दो वर्ष दिवस अट्ठारह थे,और लगा है ग्यारह माह।
महिमा इसकी बड़ी निराली लिए एकता की है चाह।।
हैं कृतज्ञ सब भारतवासी, सच्चे नेता थे अभिराम।
तोड़ पुरानी जंजीरों को, किए व्यवस्थित भारत धाम।।
संविधान के गुरु बनकर के, किए देश हित सारे काम।
राष्ट् हितैषी सेवक को मैं, करती हूंँ शतत् प्रणाम।।
प्यारे बच्चों अमल है करना, इसके वर्णित सुंदर भाव।
मान मिलेगा हरदम तुमको, संविधान से रखो लगाव।।
डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश



