
मेरी कुटिया में गुरु जी आज आयेंगे,
मेरे सोए हुए भाग्य भी जग जायेंगे।
धूल भरे आँगन में दीपक सजाऊँ मैं,
मन के मंदिर में श्रद्धा के फूल चढ़ाऊँ मैं।
उनके चरणों की आहट से पावन हो धरा,
हर श्वास में बस जाये उनका मधुर नूर भरा।
अज्ञान तमस सब दूर भाग जायेंगे,
ज्ञान के सूरज से जीवन जगमगायेंगे।
सूखी डाली पर फिर हरियाली छा जाएगी,
बंजर धरती भी अमृत से नहा जाएगी।
कृपा दृष्टि जब मुझ पर वो बरसायेंगे,
मेरे जीवन के सब संकट मिट जायेंगे।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




