
प्रेम और समर्पण से,
भगवान की भक्ति ही
जीवन का सार है।

इस पावन मार्ग पर चलना,
सबसे बड़ा संस्कार है।
जहाँ नाम प्रभु का बसता है,
वहाँ शांति का वास है।
हर सांस में राम बसे हों,
ऐसा ही मधुर एहसास है।
मन का दीप जलाकर देखो,
अंधकार मिट जाता है।
श्रद्धा की निर्मल धारा में,
हर दुख बह जाता है।
भक्ति वह अमृत धारा है,
जो जीवन को तर करती है।
टूटी हुई हर आशा को,
फिर से सुंदर कर देती है।
ईश्वर की लीला अपार है,
समझे कोई विरला है।
जिसने हृदय से उसे पाया,
उसका जीवन उजला है।
नाम स्मरण ही साधना है,
यही परम उपकार है।
प्रेम और समर्पण से,
भगवान की भक्ति ही जीवन का सार है।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




