सच्चे मन की साधना, मिल जाएं रघुराज।
हर साधक की कामना, प्रभु दर्शन हों आज।
मेरे घर पधारो हे, सीता पति श्री राम।
कभी नहीं फिर जाइये , मेरे तुम सुख धाम।
प्रेमी मन पलती रहे, पल पल ऐसी प्रीत।
हार कभी पाये नहीं, मिल जाएगी जीत।
कुँ० प्रवल प्रताप सिंह राणा ‘प्रवल’, ग्रेटर नोएडा



