
निर्मल है वृक्ष यहां पर ,
हैं हरियाली सी सज्जा यहां पर।
पृथ्वी है गोल हमारी ,
ना त्रिकोण , ना चौकोर ।।
अलग अलग यहां फुल है खिलते ,
अलग अलग यहां पंछी उड़ते।
सुंदर है बड़ी पृथ्वी हमारी ,
हर ग्रह में पहले जानी जाती ।।
पृथ्वी हमारी पालन हार,
सबको दे भर कर भंडार ।
सुन्दर सी ओड कर ओढ़नी,
पृथ्वी दिखती निराली ।।
आओ सब गाओ,
पृथ्वी को बचाओ ।
पेड़ पौध लगाओ ,
गंदगी से बचाओ ।।
सुख रह है पानी इसका ,
रो रही है ये भी डर से ।
जन जीवन का भार उठाती,
सबके ये प्राण बचाती ।।
पृथ्वी ऐसा स्थल हैं,
जग सब संयम हैं।
सोचो तो समझ आए ,
अपनी पृथ्वी कैसे बचाए ।।
निर्मल है वृक्ष यहां पर ,
हैं हरियाली सी सज्जा यहां पर।
पृथ्वी है गोल हमारी ,
ना त्रिकोण , ना चौकोर ।।
– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




