
प्रेम में तेरे,
खुदको बांध बैठी हूँ।
प्रेम में तेरे,
खुदको सजाए बैठी हूँ।
तू नाराज़ होता,
तो में बेचैन हो जाती हूँ।
तू समझ मेरे यारा,
में दूर हूँ पर पास हूँ।
तेरे पास नहीं ,
पर ये साथ हूँ।
ऐसे बेचैन मत कर ,
में हा जाऊंगी ।
मुझसे दूर मत हो ,
में बिखर जाऊंगी।
– रिया राणावत
कालीदेवी, झाबुआ(मध्यप्रदेश)


