साहित्य

गजल

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

मधुर प्रेम धाम की वाटिका ,देखेंगे वृंदावन में,
यमुना जल में गोता पावन, जाएंगे वृंदावन में।

कान्हा जी के चरणों में हम , अर्पित तन -मन कर देंगे,
भाव -अश्रु के पुष्प चढ़ाकर , सुख पाएं वृंदावन में।

बरसाने की गलियों में हम , रंग प्रेम के खेलेंगे,
राधा रानी को पुकार कर,गाएंगे वृंदावन में।

कितना प्यारा वृन्दावन है , जहां कृष्ण राधा बसते,
लीलाओं का सुमिरन करके , गीत लिखें वृंदावन में।

संतों की वाणी से जीवन, अपना यूँ महकाएंगे,
ज्ञान सुधा रस पीकर हम सब,निखरेंगे वृंदावन में।

काव्य गोष्ठी का आयोजन , शानदार होगा सुंदर,
रचनाकार पढ़ेंगे कविता , झूमेंगे वृंदावन में।

मन रम जाता है निधिवन में , सदा वहीं रहना चाहे ,
एक अलग दुनिया है सुख की , सुमन बसे वृंदावन में।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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