
नवी मुंबई । नवी मुंबई की साहित्यिक धरती एक बार फिर काव्य रस से सराबोर हो उठी, जब मकाम नवी मुंबई इकाई द्वारा एक सजीव एवं आत्मीय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन संस्थापक डॉ. नरेश नाज के मार्गदर्शन में तथा उपाध्यक्ष डॉ. सुजाता उदेशी के आतिथ्य में वाशी स्थित उनके निवास पर सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अग्निशिखा मंच की अध्यक्षा डॉ. अल्का पांडे द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिससे वातावरण में एक दिव्य आभा व्याप्त हो गई। इसके पश्चात सीमा श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भावपूर्ण शुरुआत दी।
काव्य गोष्ठी में अध्यक्ष सीमा त्रिवेदी ‘साज़’, सचिव मनीषा जांब, दिव्या सिंह, कविता ए. झा, स्वाति लाहोटी, रीना धीमान ‘स्वर्ण’ तथा चंद्रिका व्यास सहित सभी कवयित्रियों ने अपनी-अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ किया। विविध भावों से सजी इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और प्रत्येक कविता पर तालियों की गूंज से वातावरण गूंजायमान रहा।
कार्यक्रम की विशेषता केवल काव्य-पाठ तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसमें झलकता आत्मीयता का भाव भी आकर्षण का केंद्र रहा। सभी प्रतिभागी मानो अपने छात्र जीवन की मधुर स्मृतियों में खो गए। डॉ. सुजाता उदेशी द्वारा स्नेहपूर्वक परोसी गई चाय और आत्मीय स्वागत ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया।
समयबद्धता और अंत तक साहित्यकारों की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बनाए रखा। यह गोष्ठी न केवल साहित्य सृजन का मंच बनी, बल्कि आपसी संबंधों को सुदृढ़ करने का माध्यम भी सिद्ध हुई।
निस्संदेह, यह काव्य संध्या नवी मुंबई की साहित्यिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जिसने शब्दों के माध्यम से सभी के हृदय को स्पर्श किया।
— कविता ए. झा, नवी मुंबई




