साहित्य

महाकुंभ

रेनू मिश्रा

30 जनवरी 2025 ब्रहस्पतिवार के दिन मैं अपने परिवार के साथ अरैलघाट संगम में स्नान करने गई।साथ में मेरी छोटी बहन का परिवार भी गया।जाते समय जिस ओर दृष्टि जाती हर ओर सर पर बोझा उठाए लोगों की अविस्मरणीय भीड़ दिखाई दे रही थी।या यूं कहें देश विदेश से जन का हुजूम उमड़ पड़ा था। आस्था विश्वास का अद्भुत दृश्य दिखाई पड़ रहा था।

कुछ दूरी के बाद हम सबको पैदल चलना पड़ा। लोगों की कुछ अनूठी बातें भी सुनाई पड़ी।दो लड़के आपस में स्नान करने के बाद आपस में संवाद कर रहे थे।एक ने कहा,” आज तुम बहुत देर तक नहाए।” दूसरे ने कहा,” अरे यार बहुत पाप हो गया था उसी को मल- मर के धो रहे थे।सारा पाप धो डाला।44 साल बाद ये महाकुंभ आया है।लोग कह रहे थे जो इस कुंभ में नहायेगा उसके सारे पाप धुल जायेंगे।”ऐसा सुनते मैं और मेरी बहन कामिनी खूब हंसे।दोनों लड़कों की बातें हम सबके लिए आनंद का विषय बन गई थी।

कुछ लोग पाप धोकर नये पाप करने की तैयारी में थे। कुछ पाप धोकर पुण्य बटोरना चाह रहे थे,तो कुछ भक्ति भाव से पुण्य प्राप्त करने आए थे।

दो महिलाएं आपस में बात कर रही थीं। एक ने कहा, हमारे पति नहीं आएं तो क्या हुआ? हम उनके नाम की डुबकी लगा लेंगे तो उनके हिस्से का पाप कम हो जायेगा। नैनी के पुराने पुल में अत्यधिक भीड़ होने के कारण 1 घंटे तक जाम में हम लोग फंसे थे।मन भ्रमित था कि स्नान कर पायेंगे या नहीं।पर किसी तरह जाम का सामना करते हुए अरैल के संगम घाट पहुंचे। वहां का दृश्य अद्भुत था। लोगों की श्रद्धा विश्वास का अनूठा संगम देखने को मिला। मां गंगा की महिमा को शब्दों में बांध पाना संभव नहीं था। लाखों की तादात में लोग स्नान कर रहे थे। मां गंगा सबको शीतलता प्रदान कर रही थी।हम सब स्नान करके लौटने लगे। लौटते समय तो और अधिक जाम मिला।लग रहा था अब इस भीड़ में प्राण निकल जायेंगे। 2 घंटे के बाद जाम से मुक्त हम अपने घर की ओर बढ़े। रास्ते में सर पे गठरी लेकर जाते लोग को देखकर नमन करने का मन कर रहा था, क्योंकि न जाने कितने मील वो पैदल चलकर मां गंगा के नाम इस रहे थे। कुछ महिलाएं मां गंगा के भजन गाती हुई चल रही थी,तो कुछ नाचते हुए चल रहे थे। आनंद की अद्भुत चमक सबके चेहरे पर छाई थी। क्या रात क्या दिन मां गंगा में स्नान करने वाले लोगों का तांता लगा रहा।

अत्यधिक भीड़ के कारण मौनी अमावस्या की रात 2 बजे के करीब संगम नोज पर भगदड़ की सूचना की खबर आई। बहुत अधिक लोग घायल हो गए थे और कई लोगों की मृत्यु हो गई थी। माननीय मुख्यमंत्री के सुनियोजित व्यवस्था के बाद भी यह घटना घटी।इस घटना ने मुख्यमंत्री के मन को पीड़ा से भर दिया। मुख्यमंत्री जी ने घायलों का इलाज मुफ्त में करवाये। मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए रो पड़े। उन्होंने मृतकों के घर वालों को 25-25 लाख रुपये देने का ऐलान किया।इस घटना ने सबको एहसास करा दिया कि जीवन मृत्यु मनुष्य के हाथ में नहीं है।

 

रेनू मिश्रा “दीपशिखा” प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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