
मेरा जीवन, लंबे समय से करीब पंद्रह से अधिक समय से घर से जंगल तक धूमने में व्यक्त किया ओर सतत् सक्रिय रहती हुए धर्म और राजनीति से कोसों दूर मानव मात्र पशु पक्षी सभी से प्यार करते व्यक्त किया, जो कुछ चौकने वाला इतिहास रचा है मिला है सब कुछ ईश्वर आशीष है जो शायद बचपन से ही साथ है
घर बैठे सब कुछ मिलता रहा नाम शोहरत और दुनिया में छाई हुई यह पहचान जिसने मेरे जीवन को अमर हो दिया
सैकड़ों भाषाओं में अनुवाद हुआ सैकड़ों प्रतिभाओं द्वारा यू ट्यूब पर दस्तक देती महान् स्वर साधकों द्वारा रचनाएं आईं फिर एक दिन बड़े बेटे ने कहां क्यों किसी की गर्ज करते हैं आप ख़ुद कविता कथा सुनाए सोचा सही बात बोल रहा है
सालों तक आकाशवाणी पर दस्तक दे सीधा प्रसारण मेरे स्वर में बेहिसाब हुआ है राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि थी बस ख़ुद के स्वर में बेहिसाब यु ट्यूब पर दस्तक देती कविता ओर कथा सुनाए गई हजारों हजारों द्वारा सराही गई
तभी एक दिन मेरी खास मित्र महा विद्यालय झाबुआ में हिंदी विभाग की अध्यक्ष थीं मैं उनका सम्मान करता था और वो मेरा बहुत आदर और सम्मान देती थीं डॉ अंजना मुवेल जी जो वर्तमान में कन्या महाविद्यालय प्राचार्य झाबुआ में है
उन्होंने ही आदर्श महा विद्यालय के शिक्षक मुकेश बघेल जी जो उनके छात्र थे मेरे साहित्य पर पी एच डी करने को प्रेरित किया और आज वह लगभग पूर्ण हो रही हैं उन्होंने ही अपने कॉलेज में आई अंग्रेजी की याख्यता डॉ पुलकिता जी आनंद को अंग्रेजी भाषा में अनुवाद के लिए आदिवासी कथाओं की आवश्यकता पर मुझ से मिलाया बस मन से उनको सारी कथाओं को दिया बहुत बहुत ही मुश्किल से उन्हें
रास आई जिस तरह की कथा वो चाहती थी उन्होंने मुझे खूब दौड़ाया हर दो चार दिन में कथाएं ले उनके
कॉलेज गया जिद्दी हूं फिर मेरे पिता जी अर्थात पापा के बड़े भाई अद्भुत ज्योतिषी थे उन्होंने कहां था तेरी रचनाओं को अंग्रेजी भाषा में विदेश द्वारा चाही जाएगी तेरे विश्व में छाने के योग है तुम अंग्रेजी सिख लो मैने तब मैं 11वी का छात्र था मैंने उनको साफ़ मना कर दिया बोला यह उनका विषय है उन्हें चाहिए तो यह बात याद आई बस मन से डॉ पुलकिता जी आनंद को अंग्रेजी भाषा में अनुवाद के लिए रचनाओं को देता रहा आखिर दस लघु कथाओं का चयन किया उन्होंने और जल्दी ही देश के ख्यातीप्राप्त प्रकाशक से कृति सामने आई अंग्रेजी भाषा में अनुवाद लघु कथाओं की उनके जीवन की पहली कृति थीं और मेरे जीवन की अंग्रेजी भाषा में अनुवाद पहली कृति तभी उन्होंने बताया,सर जी यह किताब अमेज़न पर उपलब्ध है सारी दुनिया पड़ेगी और बताया कल मेरे पास एक न्यूजीलैंड की महिला का फोटो आया है या किताब पढ़ते हुए पर सर आप तो जानते हैं यह लोग कैसे रहते हैं चित्र उचित नहीं समझा मेने आप को देना में भी चुप रहा
तभी दो साल बाद मेरे वाट्स पर दस्तक देते मित्र सालों से थे अक्सर वो मेरे पोस्ट देखते और कभी कभी जय श्री कृष्ण लिख देते सालों बाद उन्होंने अपना प्रकाशन लिंक भेजा एक दिन मैने उनको अपनी रूप नहीं रूह है की कविताएं भेजी बोला आप इन्हें प्रकाशन करेंगे और ईश्वर आशीष था किसी खास अपने की दुआएं थी वो तैयार हो गए बोले सर जी में आपकी कविता पढ़ता हूं आप मेरे लिए प्रेरणा है और उन्होंने मात्र एक माह में दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कृति इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित कर दी
अमेज़न लिंक भेजा अर्थात सारी दुनिया में झाबुआ के नाचीज़ फकीर की हिंदी भाषा में अमेज़न कृति है बहुत बहुत खुशी हुई और सिलसला चल पड़ा इस ईश्वरीय आशीष का सुकून यह मिला कि में अपनी स्व पत्नी ऊषा जी की यादों से मुक्त कुछ हुआ और सृजन शील रहा या ईश्वर करता रहा यह कहना ही सत्य है
आज देस और दुनिया में छाई हुई है मेरी, 16वीं कृति इस बीच बेहद तबीयत खराब हुई आई सी रूम में जिंदगी की आखरी सांसे चल रही थी और पता नहीं किस रूह की ईश्वर की कृपा दुआं से मौत के दरवाजे से लौट कर आया यह अद्भुत सत्य मे और डॉ बघेल ही जानते है मौत के दरवाजे से वापस लौटा हूं यानी ईश्वर कुछ चाहता है बस यही सोच और चिंतन सकारात्मक बन गया और जीवन को लगा दिया सृजन शील हो पता नहीं कौन है जो अद्भुत ताकत और ऊर्जा देता है कि मैं ख़ुद चौक जाता हूं मात्र दस दिन में दो कृतियों को लिख दिया और आज देश और दुनिया में छाई हुई है
वो लड़की याद आती हैं
और आदिवासी जन जीवन
प्रणाम सत् सत् वंदन ईश्वर कृपा को सत् सत् वंदन पूज्य आराध्य रूह को सत् सत् वंदन
डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ द्वारा
एक अद्भुत सत्य ईश्वर आशीष जो
अविश्वनीय लगता हैं पर हर शब्द सत्य है




