साहित्य और दर्शन के पुनर्जागरण हेतु संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित
शिक्षा के क्षेत्र में साहित्यिक विधाओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता:डाॅ.शिवेश्वर दत्त पाण्डेय भारतीय मनीषियों का ज्ञान सम्पूर्ण विश्व की अमूल्य धरोहर:डाॅ.विद्यासागर उपाध्याय
नगरा (बलिया)। स्थानीय आर.एन. इंटरनेशनल स्कूल, घोसी मार्ग के प्रांगण में ‘दि ग्राम टुडे’ प्रकाशन समूह एवं ‘दिव्य गंगा सेवा मिशन’ के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य एवं दर्शन के पुनर्जागरण विषयक एक गरिमामयी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड से पधारे सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं संपादक डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने शिक्षा और साहित्य के अंतर्संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक काव्य, गद्य एवं अन्य साहित्यिक विधाओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्य को शिक्षक समाज अपनी निष्ठा एवं प्रतिबद्धता से सफल बना सकता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अंतर्राष्ट्रीय विचारक एवं साहित्यकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने भारतीय आध्यात्मिक दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय मनीषियों का ज्ञान सम्पूर्ण विश्व की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भारतीय मनीषियों के अभूतपूर्व योगदान को आत्मसात कर आधुनिक शिक्षा पद्धति में समाहित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर साहित्य एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु डॉ. विद्यासागर उपाध्याय को ‘साहित्य सेवी सम्मान’ एवं ‘गंगा सेवी सम्मान’ से अलंकृत किया गया। साथ ही वीरेंद्र प्रताप यादव, डॉ. आदित्य कुमार अंशु, विंध्याचल सिंह, सुनील सिंह ‘समाजवादी’, सुनील तिवारी, आशुतोष तिवारी, आशीष श्रीवास्तव, रामकृष्ण मौर्य एवं डॉ. सैय्यद सेराज अहमद को माल्यार्पण, अंगवस्त्रम एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में संस्थान के प्रबंधक राधेश्याम यादव ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक रामकृष्ण मौर्य ने कुशलतापूर्वक किया।
इस अवसर पर डॉ. सेराज अहमद, आशुतोष तिवारी, सुनील कुमार सिंह, वीरेंद्र प्रताप यादव, आशीष कुमार श्रीवास्तव, दिलीप कुमार राजभर, रवि चौहान सहित अनेक साहित्यप्रेमी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ एवं ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ हुआ।




