
एक मई के दिन सभी, दें मजदूरों मान ।
उनके कारण की बढ़े, सदा देश की शान ।।
भूख -प्यास को भूलकर, करते रहते काम ।
निर्मित करें हर वस्तु वो , देती जो आराम ।।
खून-पसीना सींचकर, रचते नवल जहान ।
दृष्टि हमेशा तुम रखो, प्रति उनके सम्मान ।।
स्वयं धूप में जल रहे, औरों को दें छाँव।
शहर बनाया श्रमिक ने, भूल गया निज गाँव ।।
हाथों में छाले पड़े, मस्तक से श्रम-धार ।
सृजन नवल करके सदा, दें जीवन आधार ।।
✍️हेमा जालान’कनक’ मुंगेर




