साहित्य समाचार

श्रमिक

डा राजेश तिवारी मक्खन

सावधान होकर के श्रमिक काम करो अभिराम।
शरीर सुरक्षित रखना अपना करो देश का नाम।।

विश्व कर्मा के वंशज उनको नमन करो ।
सुंदर शिल्प गढ़ों स्वदेश को चमन करो ।।
विविध भाव श्रंगार सुमन सा रंग भरो ।
प्रकृति परम्परा पूर्वजों सी प्राप्त करो ।।
मेहनत श्रमिकों की ये भारी आये सबके काम ।
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स्वर्ण लौह व लकड़ी का सब काम किया ।
जितना काम किया उतना न मूल्य लिया ।।
सुंदर भवन इमारत दी क्या क्या न किया ।
मोती बने स्वेद से तेरे पानी परिश्रम पिया ।।
अरे नींव की ईंट पीठ पर लादा बोझ तमाम ।
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तुम समाज के सेवक बन सुन्दरता गढ़ते ।
भव्य भवन मंदिर पर स्वर्ण शिखर मढ़ते ।।
कल कारखानों खेतों में तुम श्रम करते ।
फसल और अनाज दलहन तिलहन झरते ।।
मन में मक्खन मनन करें तुम कम करते आराम।
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डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र

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