
*1. विश्वशांति*
सपना
सबका साँझा
बंदूकें हों खामोश
बच्चे पढ़ें बेफ़िक्र होकर
*2. विश्वशांति*
प्रेम
भाषा एक
सरहदें मिटा देती
दिल जोड़ती हर बार
*3. विश्वशांति*
शुरुआत
खुद से
नफ़रत त्याग कर
दुनिया बदलेगी धीरे-धीरे
*4. विश्वशांति*
प्रार्थना
सिर्फ़ नहीं
कर्म भी चाहिए
मिलकर बाँटें रोटी पानी
*5. विश्वशांति*
संवाद
हथियार से
बेहतर हल देता
टेबल पर सुलझे विवाद
मौलिक रचनाकार डॉ कृष्ण कांत मिश्र




