साहित्य

विश्वशांति आइकू

डॉ कृष्ण कांत मिश्र

*1. विश्वशांति*
सपना
सबका साँझा
बंदूकें हों खामोश
बच्चे पढ़ें बेफ़िक्र होकर

*2. विश्वशांति*
प्रेम
भाषा एक
सरहदें मिटा देती
दिल जोड़ती हर बार

*3. विश्वशांति*
शुरुआत
खुद से
नफ़रत त्याग कर
दुनिया बदलेगी धीरे-धीरे

*4. विश्वशांति*
प्रार्थना
सिर्फ़ नहीं
कर्म भी चाहिए
मिलकर बाँटें रोटी पानी

*5. विश्वशांति*
संवाद
हथियार से
बेहतर हल देता
टेबल पर सुलझे विवाद

मौलिक रचनाकार डॉ कृष्ण कांत मिश्र

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