
मीना भारत की एक प्रमुख जनजाति है । इसका उद्गम स्थल राजस्थान एवं मध्य प्रदेश के क्षेत्र को माना जाता है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र को मत्स्य देश कहा जाता था, इसलिए इन्हें मत्स्य गणराज्य के वंशज माना जाता है।
‘मीन पुराण’ के अनुसार मीना या ‘मीणा’ की उत्पत्ति भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से मानी जाती है। इसलिए मीणा लोग मीनेश्वर की उपासना भी करते हैं। इसके अलावा प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में से एक ‘मत्स्य’ जनपद था। मत्स्य जनपद के लोग उसी साम्राज्य के मूल निवासी हैं।
1954 में भारत सरकार ने मीना समुदाय को अनुसुचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया ।इसके बाद इन्हें भी वहां आरक्षण का लाभ मिलने लगा ।
व्यापार और बेहतर जीवन की खोज में इनके कुछ समूह अपने क्षेत्र से पलायन कर पश्चिम उत्तर प्रदेश के मथुरा, बदायूं, बरेली, मुरादाबाद आदि जिलों में आकर बस गए।
वर्तमान में इनकी प्रमुख मांग है कि उत्तर प्रदेश में भी इन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाए और आरक्षण का लाभ दिया जाए। परंतु समस्या यह है कि उत्तर प्रदेश की ST सूची में अधिसूचित न होने के कारण इस जनजाति को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
इसका कारण यह है कि अन्य राज्य के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हर राज्य के अपने नियम-कानून अलग-अलग होते हैं। फिर भी यह समुदाय उत्तर प्रदेश में आरक्षण का लाभ पाने के लिए प्रयासरत है और इस समस्या का समाधान भी होना चाहिए।
मुकेश कुमार दीक्षित ‘शिवांश’ चंदौसी



