
मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले में दस्तक दे हुए, नई कविता और लघु कथाओं के देश के ख्यातीप्राप्त नाम डॉ रामशंकर चंचल जी आज देश और दुनिया में नई कविता और लघु कथाओं की वजह से छाया हुआ अद्भुत नाम है बेहिसाब पढ़ा जाता और लाखों में सुना जाता यह देश के विरले साहित्य साधक हैं
उनकी कविता, अकेला होना, उन्हीं के अद्भुत प्रस्तुति उम्दा स्वर में सारी दुनिया में छाई हुई यादगार कालजयी कविता बन गई हैं जो अभी तक एक लाख चार हजारों द्वारा सुन सराही गई और उन सुनने वाले को इतनी रास आई कि उन्हें सैकड़ों युवा कोचिग क्लास और मित्रों को परिवार को यहां तक कि गाँव में खेत और खलियानों में दस्तक दे सुनी जा रहे हैं जो चौकने वाला सत्य है
मोक्ष प्राप्ति की, अकेले में ईश्वरीय आशीष का अहसास कराती प्रकति को ईश्वर मान सत्य से परिचय कराती यह वो अद्भुत कविता हैं जो कई भाषाओं में दस्तक दे अनुवाद की जा चुकी हैं
आज एक ही कविता अकेला होना, डॉ रामशंकर चंचल जी की पहचान बना गई जबकि डॉ रामशंकर चंचल सैकड़ों कृतियों के रचियता है और लाखों चाहने वाले देश और दुनिया के अति प्रिय साहित्य साधक है
वंदन धरा झाबुआ, वंदन मध्य प्रदेश और वंदन भारत देश जहाँ आज भी
अद्भुत महान व्यक्तित्व और साहित्य साधक है जो सारी जिंदगी साहित्य को समर्पित कर देश और दुनिया को अद्भुत साहित्य भेंट कर सुख सुकून महसूस कर रहे हैं




