
कामना हो जगत के कल्याण की।
ना कभी सोचे किसी के अपमान की।
क्रूरता कभी किसी के साथ करें नहीं।
परंतु अन्याय के सामने भी डरें नहीं।
नहीं झुके जब बात हो आत्म सम्मान की।
भावना मन में सदा रहे जगत कल्याण की।
वह जिन्होंने विश्वास तोड़ा है कभी
दे देंगे क्षमादान उनको भी,
बढ़ जाएंगे आगे जीवन में उनसे हम
पर विश्वास न कर पाएंगे उन पर कभी।
वो जन जिन्हें हमारी बहुत ही जरूरत है।
काम आ सकते हैं हम जिनके कभी,
हम हो जाएंगे उसके बांट लेंगे दुख उनके सभी।
अधिकार सबने गूगल से देख ही लिए,
सिखाएंगे उनको उनके कर्तव्य सभी।
पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचे नहीं,
यह जिम्मेदारी भी निभाऐं सभी।
प्रचार संस्कारों का करेंगे हम ,
सत्कर्म करके उदाहरण सबके लिए बनेंगे हम ही।
संघर्ष ही बनाएंगे हम अपना धर्म।
परमात्मा ने जब मन लेखक का दे दिया,
तो जिम्मेदारी निभाएंगे हम सभी, भावहीन होंगे हम कभी नहीं।
परमात्मा से प्रार्थना है यदि प्रतिकूल परिस्थिति आए भी कभी,
थाम लेना हाथ प्रभु मधु कभी डिगे नहीं।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा



