
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई,,,86
दिल चाहता था कि जीवन की राहों में एक पिता का साथ हो,
जब भी मुश्किलें आए राहों में मेरे हाथों में आपका हाथ हो।
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई,
कि कितने दिन और कितनी रातें मैंने रो रो कर है बिताई ।
सबके पिता अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारियां निभाते हैं,
जो ख्वाब देखते हैं बच्चे उन्हें पापा अपनी मेहनत से सजाते हैं।
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई।
मेरे ख्वाब सजाने की जिम्मेदारी मेरे ही हिस्से आई।
आप हमेशा से साथ थे पर रिश्ते में कोई अपनापन नहीं था,
आपको अपने दिल की कोई बात बताने का कभी मन नहीं था।
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई।
आपके होते हुए भी हमेशा मैंने महसूस की है तन्हाई।
बचपन से लेकर बड़े होने तक सब अपने दम पर ही पाया,
कभी आशीर्वाद या दुआओं का नहीं था सर पर साया।
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई,
मुझे सुकून की नींद चाहिए थी पर आपने लोरी कभी नहीं सुनाई।
सिर्फ जन्म देने से कोई पिता नहीं कहलाता है,
पिता वह होता है जो अपना हर फर्ज निभाता है।
पापा, यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई।
कि आपके जाने के बाद दिमाग में याद भी नहीं आपकी परछाई।
काश! कि आपने कभी थोड़ा सा भी प्यार दिया होता,
काश! कि कभी हमारी चाहतों का भी सम्मान किया होता।
पापा,यह बात मैंने आपको कभी नहीं बताई।
जब भी जीवन में पीछे मुड़कर देखा हमेशा आंखें भर आईं।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




