
दादा- दादी की सीख है पंच तंत्र की कहानी।
संस्कार सिखाती है खेल से बनकर वही दीवानी।
चलना पैर उठाकर संभाल रखना है।
तीसरी पीढ़ी भाग रही उसके संग चलना है।
नाना- नानी संग मोबाइल पर करते बात।
नई नई खोज कर बताते हैं दिन- रात।
दादी संग सोते जब लोरी नहीं कहानी सुनना।
नई पुरानी दुनिया की जब बातें कहना।
प्यार दुलार में दादा जी से कहते अपनी बात।
बच्चे भी फरमाइश को करते दादा से दिन-रात।
रोका टोकी दादी करती नहीं है कोई दीवार।
नयी पीढ़ी को चाहिए खुला हुआ संसार।
एक कहावत प्रचलित मूल से ज्यादा ब्याज।
सच है अनुभव में खिलते रहते सदा गुलाब।
नई पीढ़ी के साथ समझें उनके मन के भाव।
पीढ़ी अंतर मिट जाएगा मिट जाएंगे घाव।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




