विश्व भोजपुरी दिवस आ कबीर प्राकट्य दिवस पर परिचर्चा संग कवि गोष्ठी संपन्न, मानसून के पहिल बरखा में गूंजल भोजपुरी के स्वर

सलेमपुर।
विश्व भोजपुरी दिवस आ संत कबीर दास जी के प्राकट्य दिवस के शुभ अवसर पर इसारी, सलेमपुर स्थित डॉ. सियाराम यादव के आवास पर परिचर्चा सह कवि गोष्ठी के सफल आयोजन भइल। कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा, साहित्य आ कबीर साहेब के रचनात्मक अवदान पर विस्तार से विचार-विमर्श कइल गइल।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बलिया निवासी आ बिहार के मधुबनी में वाणिज्य विभाग के प्राध्यापक डा० शैलेश सिंह “शौर्य” रहलें। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डा० फतेहचंद “बेचैन” कइलें। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय के सम्मानित कइल गइल। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन डा० आदित्य कुमार “अंशु” कइलें।
परिचर्चा के दौरान वक्ता लोग कबीर साहेब के भोजपुरी काव्यधारा से जुड़ल महत्वपूर्ण कवि बतावत कहल कि उनकर भाषा में भोजपुरी के साथे कई गो भाषा आ बोलियन के शब्दन के समावेश मिलेला। विद्वान लोग भोजपुरी के वर्तमान स्थिति, चुनौतियन आ भविष्य में ओकर संरक्षण, संवर्धन आ शिक्षण में प्रयोग के जरूरत पर विशेष बल दिहल।
कार्यक्रम के विशेष आकर्षण मानसून के पहिल बरखा रहल। गोष्ठी शुरू होतहीं झमाझम बारिश होखे लागल, जवना चलते कार्यक्रम बरामदा में आयोजित कइल गइल। बरखा के फुहार, ठंडी बयार, हरियर प्रकृति आ कविता-गीत के मधुर प्रस्तुति से पूरा वातावरण साहित्यिक आ भावपूर्ण बन गइल। प्रकृति आ साहित्य के अद्भुत संगम कार्यक्रम के अउरी यादगार बना दिहल।
गोष्ठी में डॉ. सियाराम यादव, श्री संतोष कुमार “शशि”, डॉ. सेराज अहमद, श्री देवेंद्र यादव, श्री शेषनाथ विद्यार्थी, जनाब अफजल कुरैशी, श्री रामविलास चौहान आ जनाब खुर्शीद आलम के उल्लेखनीय उपस्थिति रहल। अंत में सभे साहित्यकार भोजपुरी भाषा के उन्नति खातिर निरंतर सक्रिय रहे के संकल्प




