
मन में जीओ और जीने दो, भावना
खुश रहो खुशियाँ बांटो,
सुख दुःख है जीवन पुष्प
व्यस्त-मस्त रहो,अस्तव्यस्त ना हो।
आनंदित जीवन जीना है,
जो मिला,स्वीकार करो,रखो
सतकर्म-सकरात्मकविचार,
सांस-सांस पर रहे प्रभु नाम।
है वो चित्रकार,रंग भरता
रखता कर्मों का हिसाब,
क्षमा-परिश्रम-लगन-सत्य-
दया-त्याग-संतोष स्नेह से दोस्ती कर लो।
रहना नहीं सदा यहाँ
मन अंतस रखो खिला- खिला
हँस लो खुलकर और हँसाओ
परहित जीवन जी लो जरा।
डॉ. प्रभा जैन ” श्री ”
देहरादून




