
कोई मोल नहीं इस जज़्बात का,
ये तो है अनमोल मोती प्यार का।
नापा नहीं जाता इसे दुनिया के तराजू में,
यह तो बसता है सीधे रूह के साज़ में।
जब दो दिल मिलते हैं एक अनजान राह पर,
विश्वास की डोर बंध जाती है हर चाह पर।
खामोशियाँ भी सुन लेती हैं अनकही बातें,
और रोशन हो जाती हैं अंधेरी रातें।
यह समर्पण है, कोई सौदा या व्यापार नहीं,
जिसमें हो स्वार्थ, वो सच्चा प्यार नहीं।
यह तो वो दीपक है जो आंधियों में भी जले,
और हर मुश्किल सफर में संग-संग चले।
स्वरचित एवं मौलिक
संगीता वर्म
कानपुर उत्तर प्रदेश


