साहित्य

चंदाराम चंदाचोर है

जयचन्द प्रजापति

चंदाराम पढ़ लिखकर नौकरी की तलाश में थे। विपत्ति की मारी सरकार बेचारी रोजगार नहीं दे सकी। नून-तेल के लाले पड़ गये। गरीबी चरम पर थी। प्रभु की शरण में जाने का निर्णय लिया। प्रभु भी दयावान थे। अपने भक्त को शरण में ले लिये। भक्त का ह्रदय पवित्र था। प्रभु की सेवा करने लगा।

 

प्रभु की सेवा जी जान से करने लगा। चंदाराम बेचारा जो कुछ दान-दक्षिणा में मिल जाता भरण पोषण परिवार का कर रहा था। एकदिन भक्त चंदाराम की आत्मा फट गयी। प्रभु को कोसने लगा। इतनी भक्ति से प्रभु की सेवा किये जा रहा हूँ पर प्रभु हमारी तरफ ध्यान नही दे रहे हैं।

 

चंदाराम ने प्रभु से अपनी सेवा के बदले में कुछ पारिश्रमिक बढ़ाने की अपील की ताकि बाल-बच्चों कि परवरिश ठीक से कर सके। प्रभु भक्त की अपार भक्ति से प्रभु का हृदय खुश हो गया। दान-दक्षिणा करने वालों की संख्या बढ़ने लगी।

 

चंदाराम की अब कुछ पोटली भरने लगी। फल -फूल चढ़ावा बढ़ने लगा। चंदाराम ने प्रभु की सेवा और बढ़ा दी। रात-दिन सेवा करने लगा। सेवा से प्रभु जी का हृदय गदगद हो गया। प्रभु के दरबार में ढेर सारा चंदा तथा चढ़ावा मिलने लगा। प्रभु की महिमा अपरंपार। जिसको देते हैं छप्पर फाड़ कर दे देते हैं।

 

अब चंदाराम के गरीबी के दिन हटने लगे। प्रभु की कृपा से चंदाराम ने एक बड़ी सी कोठी बनवा लिया। नौकर-चाकर रख लिया। जूता चप्पल भी नया- नया खरीद लिया। नये- नये कपड़े भी खरीद लिया। धन-दौलत से घर भर गया। प्रभु भी खुश हो गये कि हमारा भक्त अब प्रसन्न है।

 

कुछ लोगों की आंखों में किरकिरी हो गयी। यह भक्त तो गरीब था। अमीर कैसे हो गया। ये तो प्रभु का चंदा चोर है। प्रभु के विकास के लिए चंदा लोग देते हैं लेकिन चंदाराम अपना विकास खुद कर लिया। चंदाराम कौन होता है चंदा लेने वाला। सब लोगों ने चंदाराम को चंदचोर कहना शुरू कर दिया।

 

चंदाराम प्रभु की शरण में फिर गया। प्रभु बचा लीजिए। मेरा रोजगार छीना जा रहा है। सरकार रोजगार नहीं दे सकती। आप की सेवा के बदले में आपके आशीर्वाद से यह सब मिल रहा है। इतने में सरकार के चार सिपाही आये। चंदाराम को चंदा चोरी के इल्जाम में पकड़ ले गये। चंदाराम बड़ी तेजी से चिल्लाया– मेहनत हम करें, मजूरी दूसरा खाये। हे प्रभु। अंधेर नगरी, चौपट राजा। हाय रे, बेचारा भक्त चंदाराम। असहाय प्रभुजी भी कुछ नहीं बोल पाये।

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