
चल रही छुक-छुक-छुक रेल
बैठे गये मिट्ठू राजा पसार पैर,
पहन कर सुन्दर-सुन्दर कपड़े
लगा दिया डिढोंना माथे पर।
जोर-जोर से हंसते मिट्ठू
खुश हो जाते बैठ रेल में,
नानी बनाती सुन्दर रेल
और छुक-छुक करती मुँह से।
बोल नहीं पाते मिट्ठू
पर इशारा कर देते,
उन्हें रेल है बहुत पसंद
रोते से भी चुप हो जाते।
बिठा पैर पर मिट्ठू को
नानी निकालती आवाज,
कूँ कूँ…. कूँ कूँ… छुक-छुक
हिलता मिट्ठू खुश हो
जाता।
मिलती नानी पैर की सवारी
खुश होकर बैठा मिट्ठू,
दिन में कई बार
चलती रेल छुक-छुक-छुक
डॉ. प्रभा जैन श्री ”
देहरादून




