साहित्य

छह माह से छाई सोशल

डॉ रामशंकर चंचल

छह माह से छाई सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया पर दस्तक देती वो गली वो मकान,कृति बनी झाबुआ का पर्यायवाची ,डॉ रामशंकर चंचल

 

मध्य प्रदेश आदिवासी जिले में जन्म से निवास करते डॉ रामशंकर चंचल ने आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त कर मात्र तीन साल में 15, वीं अमेज़न कृति इंकलाब पब्लिकेशन बंबई द्वारा प्रकाशित चर्चित कृतियों में शामिल होने का गौरव लिए भेंट की

उसमें उनकी पहली रूह प्रेम कविताओं की कृति, रूप नहीं रूह है यह, ने अद्भुत अद्भुत देश और दुनिया में छाई हजारों हजारों द्वारा सराही गई कृति का गौरव हासिल किया और झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी साहित्य जगत में विश्व धरा पर दस्तक दी तब से लगातार उनकी कृतियों ने अपनी अद्भुत पहचान बनाई है और हाल में दस्तक देती इस वर्ष वो गली वो मकान,ने विगत छह माह से छाई हुई यादगार कालजयी कृति बन गई सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में बेहिसाब छाई हुई यह हजारों हजारों द्वारा सराही गई और देश और दुनिया के हजारों चाहने वालों द्वारा वो गली वो मकान, को देखने की ललक पैदा कर दी अक्सर पोस्ट पर दस्तक देते उनके हजारों चाहने वाले डॉ रामशंकर चंचल से मिलना चाहते है और वो गली वो मकान देखना चाहते है

सचमुच धन्य धन्य धरा झाबुआ मध्य प्रदेश आदिवासी जिले झाबुआ जो आज देश और दुनिया में साहित्य जगत में ख्यातीप्राप्त नाम है जिसका श्रेय डॉ रामशंकर चंचल की जीवन भर की राते है जो उन्होंने जाग कर व्यतीत की और बेहिसाब हिंदी भाषा में सृजन करते हुए आज देश और दुनिया में झाबुआ जिले को अमर कर दिया सचमुच वंदनीय है डॉ रामशंकर चंचल झाबुआ की पावन पवित्र धरा झाबुआ मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!