धीर धरते सुंदर से भाव भर
हर नाता निभाते नयी राह दिखाते ।
स्नेह आशीष लुटाते भरपूर।
मन भाव सभी सुंदर ,
सुधीर जी की हर बात निराली ।
साहित्य सनातन का सुधीर सवाली।
हर आचरण वरण करने योग्य।
रचते नित नया कीर्तिमान
हर विधा को साधा अर्जुन सा ।
उनकी हर अभिव्यक्ति, सृजन भरती है नवचेतना का ।
उपलब्धियां इतनी फिर भी सरल सहज से धीर वान
दादा हम सबके सुधीर ।
वंदन करती ये भगिनी महिमा
देती शुभकामनाएं आपको
शुभ जन्मदिन की आपको।
यूं ही स्नेह आशीष आपका मिलता रहे अविराम।
स्वरचित
शब्द मेरे मीत
डाक्टर महिमा सिंह




