कितना दुष्परिणाम हुआ, मासूम की मासूमियत का,
जगह-जगह नरभक्षी बैठे भक्षण करने को,
क्या उसे 13 साल की बिटिया को जीने का अधिकार नहीं था,
भेडियो की दरिंदगी ने, क्यों बच्ची का जीवन खत्म किया,
दया नहीं उनको आई क्या उनके घर में बेटी बहन कोई नहीं है इनकी माई,
फिर इतिहास दोहराया जा रहा है
डाकू फूलन देवी को फिर से याद किया जा रहा है,
डाकू नहीं उसके कर्तव्यों ने बनाया था वह तो मासूम थी अनेकों दरिंदों ने उसे डाकू तक पहुंचाया था,
नारी होना क्या अपराध है, जब तक इनको भी इनकी मंजिल तक न पहुंचा जाए इंसाफ नहीं नजर आएगा,
मानसिकता पर तब तक प्रहार नहीं हो पाएगा,
व्यक्ति की मानसिकता ने इतने खिलौने अपराध करवाए हैं,
वक्त ने फिर निर्भय कांड जैसे फिर दोहराएं हैं फिर दोहराएं हैं।।
योगेश्वरी भारद्वाज
कोसीकला मथुरा उत्तर प्रदेश




