
अबला नहीं, सबला हूँ मैं,
युग का नव अभियान हूँ।
ज्ञान, कर्म और साहस से,
भारत की पहचान हूँ॥
सीमा पर शस्त्र संभालूँ,
नभ में भरूँ उड़ान।
विज्ञानों की नई दिशा हूँ,
बढ़ता हिन्दुस्तान॥
अन्यायों से टकराना,
मेरी सच्ची रीति।
सत्य, स्वाभिमान, साहस से,
लिखती नई प्रीति॥
दुर्गा का तेज समाया,
लक्ष्मी-सा सम्मान।
सरस्वती का ज्ञान लिए,
करती जग कल्याण॥
हर बाधा को लाँघ चली,
अटल मेरा संकल्प।
आधुनिक नारी शक्ति हूँ,
बदल रही हर कल्प॥
मेरे दृढ़ पुरुषार्थ से,
जग में बढ़ता मान।
नारी का सम्मान जहाँ,
वहीं बसे भगवान॥
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार



