
जिंदगी के बाद भी आदमी जिंदा रहता है।
वह याद आता जो बात भले की कहता है।।
धन ऐश्वर्य अभिमान सब धरा पे धरा रह जाएगा।
वही इंसान कहलाता किसीके लिए दर्द सहता है।।
2
जियो और जीने दो का ही सिद्धान्त अच्छा है।
मधुर मुख वाणी का वेदांत ही सबसे अच्छा है।।
वसुधैव कुटुंबकम् के अनुपालन में ही सृष्टि रक्षा।
सबका मान-सम्मान चित शांत सबसे अच्छा है।।
3
बुलबुले सा जीवन कि पल का पता नहीं है।
मत कर कोई अभिमान कि कल का पता नहीं है।।
अहम क्रोध घृणा करते पहले स्वयं का ही पतन।
अभिमान में समय के छल का लगता पता नहीं है।।
4
न जाने जीवन की कब आखिरी शाम आ जाए।
अंतिम बुलावा और जाने का भी पैगाम आ जाए।।
सबसे बनाकर रखो बस दिल की नेक नियत से।
जाने किसकी दुआ कब जिंदगी के काम आ जाए।।
रचयिता।।एस के कपूर”श्री हंस”
बरेली।
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