साहित्य

माँ भारती की बिटिया

डॉ शिवनाथ सिंह

शत् शत् नमन – BSF जवान विष्णु प्रिया राय जी को_

माथे पर तिरंगा बाँध चली,

सीमा पे ड्यूटी निभाने को।

घर का आँगन छोड़ के आई,

देश की धरती बचाने को।

 

नाम था उसका विष्णु प्रिया,

बेटी थी वो भारत माँ की।

बंदूक कंधे पे, हौसला सीने में,

रखवाली थी हिंद की शान की।

 

गोली चली, मगर वो गिरी नहीं,

गिरी तो बस माँ की गोद में।

आखिरी साँस में भी बोली वो,

“माँ… तिरंगा झुके ना कभी”।

 

सरहद की ठंडी रातों में,

सपने अपने भूल गई।

माँ की याद आई तो चुपके से,

आँखों का पानी पी गई।

 

बोली “माँ रोना मत कभी,

तेरी कोख लाज रख लूंगी।

जब तक सांस है इस तन में,

तिरंगे की आन रख लूंगी”।

 

आजादी की कीमत क्या है,

ये सरहद पे जाकर देखो।

हर गोली के सामने सीना,

उन बेटियों का होकर देखो।

 

घर-घर उसकी गाथा गाएगा,

किताबों में नाम लिखा जाएगा।

बलिदान उसका व्यर्थ न जाए,

हर बिटिया को हौसला दे जाएगा।

 

नाम अमर हो गया उसका,

इतिहास में दर्ज हो गया।

बलिदान की वो मिसाल बनी,

हर घर की बिटिया को गर्व हो गया।

 

माँ भारती तुझे सलाम,

तेरे चरणों में कोटि प्रणाम।

तेरा लहू अमर हो गया,

तू अमर शहीदों के नाम।

 

*जय हिंद।*

*भारत माता की जय। वंदे मातरम।* 🇮🇳

 

*डॉ शिवनाथ सिंह “शिव”*

*संस्थापक*, रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच समूह, भारत

*प्रधान संपादक*, हँसवाहिनी पत्रिका प्रकाशन समूह, रायबरेली

*संपर्क*: 9260996977, 9450944945 WhatsApp

 

शत्-शत् नमन उस वीर बिटिया को।

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