साहित्य

नारी तुमको जगना होगा

पार्वती देवी

नारी तुमको जगना होगा, हथियार उठाना ही होगा।

काट पापियों के गर्दन को, खप्पर ले खूँ पीना होगा।

 

पापी अब बढ़ गये देश में, गौरा दूर भगाना होगा।

गली-गली जो कुत्ते घूमें, उनसे मान बचाना होगा।

अबला अब तक रही देश में, अब तो सबला बनना होगा।

गन्दी नज़रें घूरें तुमको, आँखें वही फोड़ना होगा।

 

हाथ बढ़े जो तरफ तुम्हारी, जड़ से ही उखाड़ना होगा।

लूट रहे जो इज्जत तेरी, उनका अंग काटना होगा।

महिषासुर के मर्दन के हित, दुर्गा-काली बनना होगा।

पापी से लोहा लेने को, लोहित देह बनाना होगा।

 

अपनी रक्षा के लिए तुम्हें, कसरत,योगा करना होगा।

जूडो-कराटे सीख ‘गौरा’, उनको धूल चटाना होगा।

बेटी तुमको जगना होगा, हथियार उठाना ही होगा।

काट पापियों के गर्दन को, ले खप्पर खूँ पीना होगा ।।

***

पार्वती देवी ‘गौरा’ देवरिया

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