
प्रेम रंग में / सराबोर हैं /
धरती वाले l
प्रेम ही पूजा / और न दूजा / सभी जानते l
लगा है मेला/ धूप छांव का/ सुबह शाम l
रामकृष्ण वि सहस्रबुद्धे, नागपुर

प्रेम रंग में / सराबोर हैं /
धरती वाले l
प्रेम ही पूजा / और न दूजा / सभी जानते l
लगा है मेला/ धूप छांव का/ सुबह शाम l
रामकृष्ण वि सहस्रबुद्धे, नागपुर