साहित्य

पुस्तक समीक्षा : ‘रसबिंदु काव्य निकुंज’

रचनाकार: श्रीमती प्रेमलता ‘रसबिंदु’ समीक्षक: अरविन्द शर्मा

भूमिका
हिंदी साहित्य में काव्य परंपरा सदैव से भाव, विचार और संवेदना की त्रिवेणी रही है। इसी परंपरा को समृद्ध करती हुई श्रीमती प्रेमलता ‘रसबिंदु’ की काव्य कृति “रसबिंदु काव्य निकुंज” एक महत्वपूर्ण और बहुआयामी संग्रह के रूप में सामने आती है। यह कृति केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवनानुभवों, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का सजीव प्रतिबिंब है।
रचनाकार का परिचय
प्रेमलता ‘रसबिंदु’ एक सशक्त और संस्कारित साहित्यिक पृष्ठभूमि से आती हैं। उन्हें साहित्यिक संस्कार अपने पिता, प्रख्यात कवि कामता प्रसाद ‘रसबिंदु’ से विरासत में प्राप्त हुए हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में भावों की परिपक्वता, विचारों की गंभीरता और अभिव्यक्ति की सहजता स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है। वे गद्य और पद्य दोनों विधाओं में समान रूप से दक्ष हैं तथा मंचीय काव्य-पाठ, दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे माध्यमों पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।
कृति की विषयवस्तु
“रसबिंदु काव्य निकुंज” विविध भावों का एक सुसज्जित उपवन है। इसमें भक्ति, श्रृंगार, हास्य, व्यंग्य, करुणा, राष्ट्रप्रेम और समसामयिक चेतना के स्वर समान रूप से उपस्थित हैं।
भक्ति संबंधी रचनाओं में आस्था और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय है।
श्रृंगार में कोमल भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति मिलती है।
हास्य और व्यंग्य में समाज की विसंगतियों पर सहज और प्रभावी प्रहार है।
कोरोना महामारी पर आधारित रचनाएँ समय का सशक्त दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं।
“योगी जी मेरा प्रिय…” जैसी कविताएँ समकालीन संदर्भों को सरलता से प्रस्तुत करती हैं, वहीं “श्रीराम” विषयक काव्य में मर्यादा, आदर्श और आध्यात्मिकता का प्रभावी चित्रण है।
“जब भी पुरवा बही होगी” जैसी रचनाएँ विरह और स्मृति की कोमल अनुभूतियों को गहराई से अभिव्यक्त करती हैं, जबकि “मैं” शीर्षक कविता आत्मबोध और अंतर्मन के द्वंद्व को सशक्त रूप से सामने लाती है।
भाषा-शैली
कवयित्री की भाषा सरल, सरस और सहज है, जो सीधे पाठक के हृदय से संवाद स्थापित करती है। उनकी रचनाओं में कृत्रिम अलंकरण की अपेक्षा भावों की स्वाभाविकता अधिक प्रभावशाली है। शब्दों की चमक से अधिक संवेदनाओं की ऊष्मा उनकी कविताओं की विशेषता है।
विशेषताएँ
बहुविध विषयों का समावेश
सरल एवं संप्रेषणीय भाषा
भावनात्मक गहराई और सामाजिक चेतना
समकालीन विषयों की प्रभावी प्रस्तुति
पारिवारिक साहित्यिक परंपरा का सशक्त निर्वाह
सीमाएँ
यद्यपि कृति अत्यंत समृद्ध है, फिर भी कुछ स्थानों पर विषयों की विविधता के कारण गहन विश्लेषण की अपेक्षा संक्षिप्तता अधिक दिखाई देती है। भविष्य में यदि कुछ विषयों पर और विस्तार हो, तो कृति और अधिक प्रभावशाली बन सकती है।
निष्कर्ष
“रसबिंदु काव्य निकुंज” एक ऐसी काव्य कृति है जो पाठक को भावों की विविध यात्रा पर ले जाती है। यह न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए पठनीय है, बल्कि नई पीढ़ी के रचनाकारों के लिए प्रेरणास्रोत भी है।
निस्संदेह, यह कृति हिंदी साहित्य जगत में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में सफल होगी और पाठकों के हृदय में स्थायी छाप छोड़ेगी।
— अरविन्द शर्मा
(सेवानिवृत्त सहायक महानिरीक्षक, निबंधन एवं आयुक्त स्टाम्प)

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