
संस्कृत की लाडली, सबकी दुलारी है,
फैली सकल जग में , यह भाषा प्यारी है।
गूंजती विश्व में भारत की पहचान बन,
सभ्यता की मिठास दिल की जुबान बन।
दूरी मिटाती है, यह सबको है जोड़ती ,
प्रगति की राह पर, भारत को है मोड़ती।
आओ मिल खाए कसम , भाल पर सज़ाएंगे,
हर दिल में हिंदी की, अब शान हम बढा़एगे ।
डॉ स्वाति पाण्डेय प्रीत




