साहित्य

विश्व हिंदी दिवस

डॉ स्वाति पाण्डेय प्रीत

 

संस्कृत की लाडली, सबकी दुलारी है,
फैली सकल जग में , यह भाषा प्यारी है।

गूंजती विश्व में भारत की पहचान बन,
सभ्यता की मिठास दिल की जुबान बन।

​दूरी मिटाती है, यह सबको है जोड़ती ,
प्रगति की राह पर, भारत को है मोड़ती।

आओ मिल खाए कसम , भाल पर सज़ाएंगे,
हर दिल में हिंदी की, अब शान हम बढा़एगे ।

डॉ स्वाति पाण्डेय प्रीत

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