
दस जनवरी का दिवस है, हिन्दी का उत्सव मान।
विश्व पटल पर गूँजती, मेरी भाषा पहचान।
हिन्दी केवल शब्द नहीं, संस्कृति की है शान।
माटी से मन जोड़ती, भारत की मुस्कान।
माँ की लोरी-सी मधुर, गुरु की वाणी ज्ञान।
मेरे जीवन-पथ की यह, बनी सदा पहचान।
विश्व सभाओं में खड़ी, आत्मगौरव संग साथ।
हिन्दी बोले सत्य जब, झुक जाए हर माथ।
जन-जन की यह वेदना, जन-जन का उल्लास।
सीधे दिल तक जा बसे, सरल भाव की आस।
देश-विदेश में आज यह, सेतु बनकर आए।
भाषा नहीं, संवेदना, मन से मन मिल जाए।
कवि की कलम, श्रमिक स्वेद, किसान का अरमान।
हिन्दी में ही ढल सका, श्रम का सच्चा मान।
मैं इस दिन को इसलिए, हृदय-दीप जलाऊँ।
अपनी बोली के लिए, विश्व मंच सजाऊँ।
हिन्दी से ही आत्मबोध, हिन्दी से विस्तार।
इसीलिए दस जनवरी, मेरा पर्व अपार।
जब तक श्वासें चल रहीं, जब तक है विश्वास।
विश्व हिन्दी दिवस रहे, मेरी साँसों की आस।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार




