
ठंडक का उत्कर्ष है, तन काॅंपे दिनरात।
रोम- रोम व्याकुल लगे, कटकट करते दाॅंत।।
कटकट करते दाॅंत, निकलना दूभर घर से।
नीचे धरती ठंड, ओस बरसे ऊपर से।। कहें’ मधुर’ कविराय, मौसमी माया लकदक।
घटाटोप घनघोर, दिखाई देता ठंडक।।
ब्रह्मनाथ पाण्डेय’ मधुर’
वार्ड नंबर-5 काॅंटी, मुहल्ला- ककटही, नगर पंचायत- मेंहदावल, पोस्ट- मेंहदावल, जिला- संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश, 272271




