
जो थके हारे लोग हैं
जीवन से
अब वो नहीं जीना चाहते हैं
मौत के साथ
जो अपनी अंतिम कहानी
लिखना चाहते हैं
जीवन के महासंग्राम में
अब हार चुके हैं
एक बार फिर कोशिश करें
नये सिरे से जीवन जीने का
भूल जाओ उन बातों को
जो बेध रहे हैं तुझे
नवजीवन का नवदिवस
फिर उजाला भरेगा
…
जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज




