साहित्य

हिंद देश की तरुणाई के नाम समर्पित रचना

सुभाष चौरसिया हेमबाबू

तुम चाह़ो तो कंकर कंकर शिव शंकर हो सकता है
तुम चाहो तो दीपक भी दिनकर हो सकता है
तुम चाहो तो राम राज्य  धरा पर ला सकते हो
तुम चाहो तो दुनिया में हिंद का परचम फहरा सकते हो
तुम चाहो तो भागीरथ बनकर  गंग धार बहा सकते हो
तुम चाहो तो दशरथ मांझी बनकर शिखर ढहा सकते हो
वंश नाश हो जायेगा  रावण का तुम राजा राम बनो तो
तुम चाहो तो कान्हा बनकर कंश को पछाड़ लगा सकते हो
तुम ही तो हो वशंज लौहपुरुष महा राणाप्रताप के
तुम चाहो तो आततायी को धूल चटा सकते हो
आजाद,भगत ,सुभाष कुर्बान हुये जिस माटी की खातिर
तुम चाहो तो माटी के कण कण को स्वर्ण बना सकते हो।
तुम चाहो तो राम नाम लिख कर पत्थर पानी पर तेरा सकते हो
तुम चाहो तो सोने की लंका में आग लगा सकते हो
तुम ही हो मां भारती के लाल जिसने सिंह के दांत गिने थे
तुम चाहो तो अस्थिपंजर को बज्र बना सकते हो
तुम ही तो वीरांगना लक्ष्मीबाई के स्वाभिमान हो
तुम ही तो गुरु गोविंद सिंह का गौरव मयी बलिदान हो
तुम ही तो वीर योध्दा अभिमन्यु का गर्भ ज्ञान हो
तुम चाहो तो वीर शिवाजी बनकर दुश्मन को धूल चटा सकते हो
हे मातृभूमि के कर्णधारों सनातन संस्कृति के तुम ही हो संवाहक
ज्ञान पुंज विवेकानंद के पद चिंहों पर चल कर
तुम चाहो तो भारत को विश्वगुरु बना सकते हो।

सुभाष चौरसिया हेमबाबू
महोबा
स्वरचित

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