
स्वामी विवेकानंद,
आदर्श, प्रेरक…
और बुद्धिमता असाधारण।
जिनका मेधावी……
और जिज्ञासु था बचपन।
गहन आध्यात्मिकता,
जिसने भारत के भविष्य
और युवाओं की क्षमता को समझा।
वे युवाओं को सशक्त बनाते
और उनमें आत्मविश्वास जगाते।
भारतीय युवाओं को अपने
गौरवशाली अतीत से जोड़कर
सशक्त भविष्य बनाने का मार्ग दिखाते।
विज्ञान और आध्यात्मिकता
के समन्वय की वो बात करते।
जो आध्यात्मिकता…
को कर्म व सेवा से जोड़े,
वो नरेन्द्र दत्त,
बने संत स्वामी विवेकानंद।
वे जीते रहे सदा साधारण जीवन,
मान्यता उनकी गरीबों में मिलेंगे भगवन।
उनकी उद्घोषणा थी उठो जागो,
और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत।
—कविता ए झा
नवी मुम्बई




