
पीली चुनरिया ओढ़े धरा,
मुस्काए अम्बर आज जरा।
कोयल ने छेड़ा मधुर राग,
फूलों में जागा नया साज
वीणा में सिमटी मीठी आस
माँ सरस्वती का हो शुभ आगमन
अज्ञान तिमिर हो दूर सभी,
मन में उजियारा भर दे माँ
खेतों में लहराए सरसों
आशा की चादर धरती ओढ़ी।
हर हृदय में हो नई शुरुआत,
बसंत लाए जीवन में मिठास।
पूनम त्रिपाठी
गोरखपुर ✍️




