
कविता गीत गजल को,
छंदों में ना बांधी थी।
लिखते छोटी छोटी कविता,
कुछ बड़ी लिख डाली थी।
नाम निराला उनका था।
बात भी उनकी निराली थी।
महाप्राण वर्णों को,
लेखन में उनको लानी थी।
ओज और क्रांति की,
जग में अलख जगानी थी।
नाम निराला उनका था,
बात भी उनकी निराली थी।
नहीं लिए कुछ जग से,
जग को ही दे डाला था।
समन्यव और मतवाला का
संपादन भार संभाला था।
नाम निराला उनका था,
बात भी उनकी निराली थी।
©️✍️®️
बंदना मिश्रा
देवरिया उत्तर प्रदेश




