
झूठ के बाजार में सच नहीं चलता
सभी झूठ बोलते हैं फ़र्क़ नहीं पड़ता!!
दुनिया रहस्यमयी हैं,
या सच को कोई समझ नहीं सकता!!
ख़ुद को बचाने के लिए दिन रात
झूठ का सहारा लिया जाता है!!
कोई सच बोलना भी चाहे,
बोल नहीं सकता!!
किसी के नज़रों से गिरने का,
सामना इंसान कर नहीं सकता!!
झूठ के बाज़ार में सच नहीं चलता
दिल में होता है ख़ौफ़,
ग़लत साबित होने का,
ज़मीर ऐसा आईना है कि,
साफ हो नहीं सकता!!
हर तरफ झूठ की दीवारें हैं
सच का मकान कहीं,
बन नहीं सकता!!
झूठ वाले पाक-साफ़ हो जाते हैं
सच का सामना,
सच ही कर नहीं सकता….
राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




