
वृक्ष डालियों से पल्लव लगे झांकने
चेहरे कलियों के लगे खिलखिलाने
बढ़ रहा मधुमक्खियों का स्नेहमिलन
भावों ने आरंभ कर दिया आवागमन
ठंडक लिये चलने लगी सुहानी बयार
मानो कोई पर्व मनाने को जैसे तैयार
प्रकाश का प्रबंध कर रहे हैं भास्कर
जो तैयारी में लगे हुए हैं नित्य आकर
चहूं दिशा ने किये जैसे सौलह श्रंगार
नभ ने भी आनन लिया अपना संवार
बहुरंगी फुर्तीली तितलियाँ लगी मंडराने
निकट आयी फ़ूलों के उनको मुस्काने
लगे इन्द्रधनुषी रंग छिटक गये धरा पर
गुंजित भवॅरें अलंकृत हुए सुमनो पर
हरी चुनरिया ओढ़ महि ने किए सिंगार
मना रहे हैं सभी बसंत पंचमी त्यौहार
मीनाक्षी शर्मा ‘मनुश्री’
गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)




