
हे विद्यादायिनी माँ शारदे
कभी पृथ्वी पर चरण तू रख दे
अज्ञानता फैली हर जगह है
ज्ञान दीप प्रज्वलित कर दे
हे विद्यादायिनी….
हे हंसवाहिनी माँ शारदे
अहंकार का तू अंत कर दे
मानव के शत्रु मानव को तू
हंस सा सीधा शांत कर दे
हे हंसवाहिनी….
हे संगीतजननी माँ शारदे
कभी वीणावादन धरा पर कर दे
कोने कोने फैले कोलाहल को
संगीत में परिवर्तित कर दे
हे संगीतजननी…
हे कमलासिनी माँ शारदे
गुण कमल के मानस में भर दे
निर्दयता भरे इस समाज का
कमल सा कोमल हृदय कर दे
हे कमलवासिनी…
हे श्वेतधारिणी माँ शारदे
श्वेत सुन्दर वसुधा को कर दे
जग के काले कर्मों के अंधेरे में
श्वेत प्रकाश प्रकीर्णनित कर दे
हे श्वेतधारिणी….
मीनाक्षी शर्मा मनुश्री




