
क्या खुशनुमा लम्हें थे वो
जब तुमने सफर में साथ लिया था हमें
अब क्या तुम छोड़ आ पाओगे वहां
जहां से साथ ले चले थे
ना हम लौट पाएंगे
वक्त बदल गया हम ना बदल पाएं
बस एक बात जान पाएं
वो लम्हें ही मुक्कमल हो पाएं
जो तुम संग बीत गए
अब ना हिम्मत रही न हौसला
रह गई है सिर्फ स्मृतियां ।
तृषा सिंह
देवघर झारखंड




