
अनुशासन से ही चलता है,मानव जीवन संसार।
बिन अनुशासन यह जीवन,हो जाता है बेकार।।
अनुशासित जीवन से खुलते,सफलता का द्वार।
अनुशासित रह कर जीएं,होता है बहुत सुधार।।
अनुशासनहीन व्यक्ति की,ये जीवन रूपी गाड़ी।
कभी उतरती पटरी से,गिरती ये जाकर खाड़ी।।
अनुशासनहीन चले कभी अगाड़ी एवं पिछाड़ी।
तरह तरह की गलती करते,कहते हमें अनाड़ी।।
यदि सड़क चलने वाला,हर यात्री व पैदल राही।
निज नियमों से चलने लगें,वो यात्री और राही।।
अव्यवस्था फैलते भिड़ने,लगेंगे लोग एवं गाड़ी।
कोई दाएं-कोई बाएं से,वे मारेंगे टक्कर गाड़ी।।
यातायात नियमों की,अनदेखी तो पड़ेगी भारी।
ट्रैफिक रूल्स तोड़ने से,जुर्माने भी होंगे भारी।।
जान भी जोखिम में होगी,चोटिल होए सवारी।
खुद की मृत्यु हो सकती,कभी पथिक सवारी।।
कभी तिहारे कारण,राहगीरों के जान पर भारी।
अनुशासन को तोड़ कर,तुमने ये टक्कर मारी।।
नियंत्रण में है मोटर चालन,तो जीवन में उन्नति।
स्वयं प्रगति करें एवं देश,समाज को दें उन्नति।।
जीवन के किसी क्षेत्र में,स्वयं को संवारें-उन्नति।
अनुशासन के बल ही,आगे बढ़ चढ़ है उन्नति।।
अनुशासन की सीढ़ी चढ़,कर लक्ष्य प्राप्त करें।
अनुशासन डोर धरे ये,जीवन लक्ष्य प्राप्त करें।।
ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.




