
पंक्तियों में उड़ते नभ में
बने, भिन्न भिन्न आकृति
दुग्ध रंग के उड़ते जाते
जैसे नदी का धवल नीर
कैसे सीखे यें अनुशासन
किसने इन्हें सिखाया धीर
पंक्ति न ही टूटे कभी भी
उड़ते जायें गगन को चीर
भावना से पूरित हैं सभी
रखते एक दूजे का ध्यान
न सिखाता कोई इनको
कृपा करें इन पर भगवान
दुख में भी यें नहीं छोड़ते
कभी एक दूजे का साथ
चाहे इनके वश में ही हो
अथवा वश में न हो बात
सीख भी सकते हैं इनसे
रहे सदा ही अनुशासन से
मेल जोल भाव सृजित हो
द्वेष किसी के न मन में हो
मीनाक्षी शर्मा ‘ मनुश्री ‘


