डा रमा द्विवेदी का काव्य संग्रह ” गंगा में तैरते मिट्टी के दीये “का लोकार्पण

हैदराबाद (तेलंगाना राज्य)। युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय दक्षिण भारतीय साहित्योत्सव का आयोजन केंद्रीय हिंदी संस्थान सभागार में किया गया। जोकि केंद्रीय हिंदी संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डा. फत्ता राम नायक ने अध्यक्षता की।

प्रथम सत्र में डा. रमा द्विवेदी की काव्य कृति ” गंगा में तैरते मिट्टी के दीये” का लोकार्पण प्रसिद्ध साहित्यकार और हिंदी सलाहकार डॉ ऋषभदेव शर्मा के मुख्य आतिथ्य में किया गया। विशिष्ट अतिथि डा राजीव सिंह ने कहा -” काव्य कृति का शीर्षक ही लोक-संस्कृति, आस्था, जीवन यात्रा, त्याग, तपस्या आदि के भाव को समेटे हुए है। आश्चर्य यह है कि पाठक इन रचनाओं में डूबता है तो बाहर निकलना नहीं चाहता है। मुख्य अतिथि डा ऋषभदेव शर्मा ने लोकार्पण के समय कहा कि कम शब्दों में कविता लिखना बड़ी चुनौती है।भाव अगर नहीं होंगे तो वह रचना केवल वक्तव्य बन कर रह जायेगी।डा रमा द्विवेदी ने इस अनुशासन को बहुत अच्छी तरह से निभाया है।
तत्पश्चात मुख्य अतिथि और सभी अतिथियों के द्वारा “गंगा में तैरते मिट्टी के दीये ” काव्य संग्रह का लोकार्पण किया गया।
दूसरे सत्र में हिंदी में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हिंदी की प्रमुख कवि और कवियत्रियो डॉ रमा द्विवेदी, डा फत्ते राम नायक,शकुंतला मिश्रा, डॉ सुषमा देवी, सरिता दीक्षित, डा राजीव सिंह, मोहिनी गुप्ता ने काव्य पाठ किया। यही नहीं डा ऋषभदेव शर्मा ने काव्यपाठ राधा कृष्ण के संवाद पर आधारित रचना ‘ हे चारुशीले’ सुना कर सभी को प्रेम रस से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन गोष्ठी संयोजिका शिल्पी भटनागर ने बखूबी निभाया।




