साहित्य

वीर-घोष

दिनेश पाल सिंह 'दिव्य'

फुसफुसाहट नहीं, हुंकार की पहचान है,
उत्तर की रणभूमि में गूंजा यही ऐलान है।

चेहरा एक, दिशा एक, ध्येय का विधान है,
योगी ही ध्वजवाहक, यही अब पहचान है।

जो डगमगाए राह में, वो खुद हैरान है,
अनुशासन की आग में हर भ्रम श्मशान है।

रणनीति संघ की, संगठन की शान है,
हर टिकट, हर चाल में राष्ट्र का ध्यान है।

लॉबी, लहज़ा, ललकार,अब सब बेमान है,
जो नहीं समझे अब, संगठन का मान है।

पोस्टर वही, प्रतीक वही, वही तूफ़ान है,
2027 की लड़ाई, पूर्ण प्रचंड अभियान है।

*दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*

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